सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

जहर अब एको फ्रेन्डली पैकिंग में



जहर की अब एकोफ्रेन्डली पैकेजिंग
भारत का सुप्रीम कोर्ट देश के पर्यावरण के लिए बेहद संजीदा है तभी तो उसने गुटखा की पैकिग पर्यावरण के अनुकूल बनाने के निर्देश दिए हैं। कम से कम यह तो कोर्ट भी मानता है कि देश के नागरिको की अपेक्षा उसे यहां का पर्यावरण ज्यादा महत्वपूर्ण लगता है नहीं तो कोर्ट से पैकिंग की अपेक्षा नशे की सभी वस्तुओं पर बैन लगाने का आदेश देना चाहिए था। इस मामले में दलितों की महिला मसीहा और उत्तर प्रदेश की मुखिया मायावती की सराहना करनी हो कि उन्होंने एक बार अपने शासनकाल में प्रदेश में पान मसाला पर रोक लगा दी थी। वहीं गांधी के राज्य गुजरात में शराब पर बैन है ये बात दीगर है चोरी छिपे यहां देशी-विदेशी शराब की खूब तस्करी होती है। वहीं अगर हम अपने पडोसी देश भूटान की बात करें तो वहां पूरे देश में तम्बाकू व नशीली चीजों पर बैन है। कोर्ट ने आदेश तो दे दिया है लेकिन गुटखा फैक्ट्रियों के मालिकान इस आदेश से बेहद चिंतित हैं उनका मानना है कि यदि वे कागज या एल्युमुनियम से बनी पैकिंग का इस्तेमाल करते है तो गुटखा को अधिक दिनों तक सही नही रखा जा सकेगा और नमी की कारण उनका उत्पाद जल्द ही खराब हो जाएगा। कागज और धातु की पैकिंग की अपेक्षा प्लास्टिक की सस्ती और आसान है। पान-गुटखा बनाने वाली कंपनियों ने इससे पहले कोर्ट के आदेश पर ही अपने उत्पादों की पैकिंग के चालीस प्रतिशत हिस्से पर बिच्छु बनाकर आदेश का पालन किया था। कोर्ट की नशीले उत्पादों पर बिच्छु बनाने की मंशा मात्र यह थी कि इसकों देखकर लोग जागरुक हो और घातक गुटखों आदि का सेवन न करें। लेकिन बिच्छू कोई कमाल नही दिखा सका। मेरा मानना है कि सरकार शराब की भांति गुटखा को भी अपने सरंक्षण में लेकर मुनाफा कमाने की जुगत बना रही है।धीरे-धीरे निजी पान मसाला कंपनियों की नकेल कसने से उद्योगपति इस पेशे से ऊब रहें हैं उन पर रोज नई नकेल कसने से उनको व्यापार करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उद्योग धंधों मंें लगे लोगों का आरोप है कि यदि गुटखा की प्लास्टिक की पैकिग को रोका जा रहा है तो पूरे देश में देशी शराब की बोतले भी प्लास्टिक ही है उन पर भी यह नियम लागू हो चाहिए। तथा स्थानीय स्तर पर बिकने वाले लगभग सभी उत्पादों में प्लास्टिक की पैकिंग का उपयोग होता है। उन पर भी बैन होना चाहिए। उनका हां और ये भी नही भूलना चाहिए कि लाटरी पर पाबंदी भी मायावती की देन है। गुटखा-तम्बाकू उत्पादों की खपत दिनों दिन आसमान छू रही है। स्टेटस सिम्बल बना गुटखा गांव देहातों में बच्चे बूढों के जीवन का अहम अंग बन चुका है गांवों में इसे अशिक्षावस अच्छा शौक माना जाता है लोग स्वेच्छा से तीज त्योहारों में इसका जमकर सेवन करते और कराते है।


शहरों में भी मसाला आम-खास सभी बडे चाव से खाते है। अरबो-खरबों का है इसका व्यापार। केन्द्र और राज्य को वार्षिक करोडो का राजस्व यही चबाने वाला गुटखा देता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया में तम्बाकू जनित सर्वाधिक मौतें भारत में होती है।कई एनजीओं और सैकडों स्वयंसेवी संस्थाए पान मसाले के प्रतिबंध के लिए देश में संघर्षरत है लेकिन अभी तक सरकार ने इसकों बंद करने का कोई इरादा नही किया है। सुलभता और सस्ते दामों में उपलब्ध होने के कारण नैनिहाल पहले इसे शौकिया खाते है बाद में लत पड़ने पर मजबूरी में उन्हे खाना पडता है। एक आकडे के अनुसार प्रति सौ लोगों पर एक पान-मसाला बेचने की दुकान है। इससे देश में गुटखा बेचने और इसके प्रसार का अंदाजा लगाया जा सकता है।
देश में गुटखा उत्पादन के कारखाने उ०प्र०, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र में है। इसके अतिरिक्त कई नामीग्रामी ब्रॉण्ड विदेश से भी आयात किए जाते हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर में ही कई देशी गुटखा नामचीन कंपनिया है। जिनकी संखया लगभग चार सैकडा है।

जहर अब एको फ्रेन्डली पैकिंग में

भारत का सुप्रीम कोर्ट देश के पर्यावरण के लिए बेहद संजीदा है तभी तो उसने गुटखा की पैकिग पर्यावरण के अनुकूल बनाने के निर्देश दिए हैं। कम से कम यह तो कोर्ट भी मानता है कि देश के नागरिको की अपेक्षा उसे यहां का पर्यावरण ज्यादा महत्वपूर्ण लगता है नहीं तो कोर्ट से पैकिंग की अपेक्षा नशे की सभी वस्तुओं पर बैन लगाने का आदेश देना चाहिए था। इस मामले में दलितों की महिला मसीहा और उत्तर प्रदेश की मुखिया मायावती की सराहना करनी हो कि उन्होंने एक बार अपने शासनकाल में प्रदेश में पान मसाला पर रोक लगा दी थी। वहीं गांधी के राज्य गुजरात में शराब पर बैन है ये बात दीगर है चोरी छिपे यहां देशी-विदेशी शराब की खूब तस्करी होती है। वहीं अगर हम अपने पडोसी देश भूटान की बात करें तो वहां पूरे देश में तम्बाकू नशीली चीजों पर बैन है। कोर्ट ने आदेश तो दे दिया है लेकिन गुटखा फैक्ट्रियों के मालिकान इस आदेश से बेहद चिंतित हैं उनका मानना है कि यदि वे कागज या एल्युमुनियम से बनी पैकिंग का इस्तेमाल करते है तो गुटखा को अधिक दिनों तक सही नही रखा जा सकेगा और नमी की कारण उनका उत्पाद जल्द ही खराब हो जाएगा। कागज और धातु की पैकिंग की अपेक्षा प्लास्टिक की सस्ती और आसान है।


पान-गुटखा बनाने वाली कंपनियों ने इससे पहले कोर्ट के आदेश पर ही अपने उत्पादों की पैकिंग के चालीस प्रतिशत हिस्से पर बिच्छु बनाकर आदेश का पालन किया था।
कोर्ट की नशीले उत्पादों पर बिच्छु बनाने की मंशा मात्र यह थी कि इसकों देखकर लोग जागरुक हो और घातक गुटखों आदि का सेवन करें। लेकिन बिच्छू कोई कमाल नही दिखा सका। मेरा मानना है कि सरकार शराब की भांति गुटखा को भी अपने सरंक्षण में लेकर मुनाफा कमाने की जुगत बना रही है। धीरे-धीरे निजी पान मसाला कंपनियों की नकेल कसने से उद्योगपति इस पेशे से ऊब रहें हैं उन पर रोज नई नकेल कसने से उनको व्यापार करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उद्योग धंधों मंें लगे लोगों का आरोप है कि यदि गुटखा की प्लास्टिक की पैकिग को रोका जा रहा है तो पूरे देश में देशी शराब की बोतले भी प्लास्टिक ही है उन पर भी यह नियम लागू हो चाहिए। तथा स्थानीय स्तर पर बिकने वाले लगभग सभी उत्पादों में प्लास्टिक की पैकिंग का उपयोग होता है। उन पर भी बैन होना चाहिए। उनका हां और ये भी नही भूलना चाहिए कि लाटरी पर पाबंदी भी मायावती की देन है। गुटखा-तम्बाकू उत्पादों की खपत दिनों दिन आसमान छू रही है। स्टेटस सिम्बल बना गुटखा गांव देहातों में बच्चे बूढों के जीवन का अहम अंग बन चुका है गांवों में इसे अशिक्षावस अच्छा शौक माना जाता है लोग स्वेच्छा से तीज त्योहारों में इसका जमकर सेवन करते और कराते है।

शहरों में भी मसाला आम-खास सभी बडे चाव से खाते है। अरबो-खरबों का है इसका व्यापार। केन्द्र और राज्य को वार्षिक करोडो का राजस्व यही चबाने वाला गुटखा देता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया में तम्बाकू जनित सर्वाधिक मौतें भारत में होती है।कई एनजीओं और सैकडों स्वयंसेवी संस्थाए पान मसाले के प्रतिबंध के लिए देश में संघर्षरत है लेकिन अभी तक सरकार ने इसकों बंद करने का कोई इरादा नही किया है। सुलभता और सस्ते दामों में उपलब्ध होने के कारण नैनिहाल पहले इसे शौकिया खाते है बाद में लत पड़ने पर मजबूरी में उन्हे खाना पडता है। एक आकडे के अनुसार प्रति सौ लोगों पर एक पान-मसाला बेचने की दुकान है। इससे देश में गुटखा बेचने और इसके प्रसार का अंदाजा लगाया जा सकता है।
देश में गुटखा उत्पादन के कारखाने उ०प्र०, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र में है। इसके अतिरिक्त कई नामीग्रामी ब्रॉण्ड विदेश से भी आयात किए जाते हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर में ही कई देशी गुटखा नामचीन कंपनिया है। जिनकी संखया लगभग चार सैकडा है।